ताज़ा खबर
- आईसीजीएच-2025: हरित हाइड्रोजन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन – 11-12 नवंबर 2025, भारत मंडपमनई
- एनजीएचएम परीक्षण कॉल - समयसीमा विस्तार 10 अक्टूबर 2025 तकनई
- नवीन हरित हाइड्रोजन उत्पादन/उपयोग प्रौद्योगिकियों को विकसित करने वाले स्टार्ट-अप्स से पायलट परियोजना के लिए प्रस्ताव आमंत्रित (सीएफपी)नई
- भारत ने एएलएमएम के अंतर्गत 100 गीगावाट सौर पीवी मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता का ऐतिहासिक मुकाम हासिल कियानई
- पीएम कुसुम टोल फ्री नंबर - 1800-180-3333
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन
- प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अभिनव परियोजना घटक के लिए प्रस्ताव आमंत्रित
- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने विकसित किया शी-बॉक्स पोर्टल
- शुद्धिपत्र 1 - नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन को समर्थन देने के लिए प्रस्ताव आमंत्रण (सीएफपी)नई
- नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में स्टार्ट-अप इनक्यूबेशन को समर्थन देने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित
- हरित हाइड्रोजन परीक्षण योजना के अंतर्गत प्रस्ताव हेतु दूसरा आह्वाननई

प्रल्हाद वेंकटेश जोशी
(माननीय कैबिनेट मंत्री)

श्रीपद येसो नाइक
(माननीय राज्य मंत्री)
नया क्या है?
- पवन टरबाइन के अनुमोदित मॉडलों और निर्माताओं की सूची में पवन टरबाइन मॉडल को शामिल करने-अद्यतन करने की प्रक्रिया में संशोधन
- सीजीएचएस लाभार्थियों के लिए परिपूर्ण मेडिक्लेम आयुष बीमा
- सौर पीवी सेल के लिए एएलएमएम सूची-II का 5वां संशोधन – दिनांक 13.02.2026
- जैव ऊर्जा मित्र कौशल विकास कार्यक्रम_एसएसएस एनआईबीई में भागीदारी के लिए रुचि की अभिव्यक्ति
उपलब्धियां
समग्र नवीकरणीय ऊर्जा में विश्व स्तर पर चौथा स्थान।
गैर-जीवाश्म (नॉन-फॉसिल) ईंधन स्रोतों से 51.9 प्रतिशत संचयी स्थापित क्षमता
वर्ष 2014 से नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन 190 बिलियन यूनिट से लगभग 2.12 गुना बढ़कर 403 बिलियन यूनिट हो गया है।
वर्ष 2014 के बाद से सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता 2.82 गीगावॉट से लगभग 48 गुना बढ़कर 135.81 GW गीगावॉट हो गई है।
वर्ष 2014 के बाद से पवन विद्युत क्षमता 21 गीगावाट से2.57 गुना बढ़कर53.99 गीगावाट हो गई।
आईआरईएनए के अनुसार, पवन ऊर्जा क्षमता में विश्व स्तर पर 4 स्थान और सौर ऊर्जा क्षमता में 3 स्थान
विगत 5 वर्षों में 86 गीगावाट की रिकॉर्ड नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि
वर्ष 2029-30 तक आईएसटीएस छूट, आरपीएस ट्रैजेक्ट्री जैसे नवोन्मेषी नीतिगत उपाय, हरित ऊर्जा खुली पहुंच नियमावली लागू की गई।
संस्थान और संगठन

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (नाईस)
राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (नाईस), नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) का एक स्वायत्त संस्थान है, जो सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए एक शीर्ष संस्थान है।

राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (नीवे)
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) भारत सरकार द्वारा वर्ष 1998 में चेन्नई में स्थापित एक स्वायत्त अनुसंधान और विकास संस्थान है।

राष्ट्रीय जैव ऊर्जा संस्थान (नीबे)
सरदार स्वर्ण सिंह राष्ट्रीय जैव ऊर्जा संस्थान (एसएसएस-नीबे), कपूरथला (पंजाब) नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का एक स्वायत्त संस्थान है।

भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास संस्था लिमिटेड (इरेडा)
भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास संस्था लिमिटेड (इरेडा), नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन एक 'नवरत्न' गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान है। इरेडा मुख्य रूप से परियोजनाओं की स्थापना को बढ़ावा देने, उनका विकास करने और वित्तीय सहायता प्रदान करने में शामिल है।

सोलर एनर्जी कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेकी)
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के अंतर्गत एक अनुसूची-क केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (सीपीएसई) है, जो भारत और विदेशों में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं (सौर, पवन, हाइब्रिड, चौबीसो घंटे अक्षय ऊर्जा, हाइड्रोजन आदि) का कार्यान्वयन और विकास कर रहा है।

राज्यों की अक्षय ऊर्जा ऐजेंसियों का संघ(एरियास)
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) देश में ग्रिड-कनेक्टेड और ऑफ-ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय स्तर पर नोडल एजेंसी है। मंत्रालय के कार्यक्रम नवीकरणीय ऊर्जा (आरई) के लिए राज्य नोडल एजेंसियों (एसएनए) के साथ निकट समन्वय में कार्यान्वित किए जाते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, विभिन्न सरकारों के बीच एक संधि आधारित संगठन है, जिसका लक्ष्य सौर ऊर्जा के व्यापक विकास के लिए वर्ष 2030 तक आवश्यक 1000 बिलियन यूएस डॉलर जुटाना है। भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति श्री फ्रॉंस्वा ओलांद द्वारा 30 नवम्बर, 2015 को स्थापित ISA का लक्ष्य सौर वित्तपोषण, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, अनुसंधान और विकास तथा क्षमता निर्माण के लिए मांग जुटाकर सौर ऊर्जा और विद्युत का उत्पादन बढ़ाना तथा उत्पादन की लागत में कमी लाना है।
और पढ़ें

















