कोलकाता (बंगाली:কলকাতা,अंग्रेज़ी:Kolkata)भारत केपश्चिम बंगालराज्य कीराजधानी है और भारत के प्रमुख महानगरों में से एक है। प्रशासनिक रूप से यहकोलकाता ज़िले में स्थित है। कोलकाताहुगली नदी के पूर्वी किनारे परबांग्लादेश की सीमा से 80 किमी दूर बसा हुआ है। यहबंगाल की खाड़ी के शीर्ष तट से 180 किलोमीटर दूर स्थित है। कोलकाता भारत का दूसरा सबसे बड़ामहानगर तथा पाँचवा सबसे बड़ा बन्दरगाह है। इस शहर काइतिहास प्राचीन है। इसके आधुनिक स्वरूप का विकास अंग्रेजो एवंफ्रांस केउपनिवेशवाद के इतिहास से जुड़ा है। आज का कोलकाता आधुनिक भारत के इतिहास की कई गाथाएँ अपने आप में समेटे हुए है। यह नगर भारत के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तनों के प्रारम्भिक केन्द्र था। महलों के इस शहर को 'आनन्द का शहर' भी कहा जाता है।[1][2]मुग़ल शासन ने विद्रोह को आसानी से दबा दिया, किन्तु उपनिवेशियों का ईंट व मिट्टी से बना सुरक्षात्मक ढाँचा वैसा ही बना रहा और 1700 में यह फ़ोर्ट विलियम कहलाया। 1698 में अंग्रेज़ों ने वे पत्र प्राप्त कर लिए, जिसने उन्हें तीन गाँवों के ज़मींदारी अधिकार कथा (राजस्व संग्रहण का अधिकार वास्तविक स्वामित्व) ख़रीदने का विशेषाधिकार प्रदान कर दिया।
अपनी उत्तम अवस्थिति के कारण कोलकाता को 'पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार' भी कहा जाता है। यह रेलमार्गों, वायुमार्गों तथा सड़क मार्गों द्वारा देश के विभिन्न भागों से जुड़ा हुआ है। यह प्रमुख यातायात का केन्द्र, विस्तृत बाजार वितरण केन्द्र, शिक्षा केन्द्र, औद्योगिक केन्द्र तथा व्यापार का केन्द्र है। अजायबघर, चिड़ियाखाना, बिरला तारमंडल, हावड़ा पुल, कालीघाट, फोर्ट विलियम, विक्टोरिया मेमोरियल, विज्ञान नगरी आदि मुख्य दर्शनीय स्थान हैं। कोलकाता के निकट हुगली नदी के दोनों किनारों पर भारतवर्ष के प्रायः अधिकांश जूट के कारखाने अवस्थित हैं। इसके अलावा मोटरगाड़ी तैयार करने का कारखाना, सूती-वस्त्र उद्योग, कागज-उद्योग, विभिन्न प्रकार के इंजीनियरिंग उद्योग, जूता तैयार करने का कारखाना, होजरी उद्योग एवं चाय विक्रय केन्द्र आदि अवस्थित हैं। पूर्वांचल एवं सम्पूर्ण भारतवर्ष का प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र के रूप में कोलकाता का महत्त्व अधिक है।
आधिकारिक रूप से इस शहर का नाम कोलकाता 1 जनवरी 2001 को रखा गया। इसका पूर्व नामअंग्रेजी में "कैलकटा' था लेकिन बांग्ला भाषी इसे सदा कोलकाता या कोलिकाता के नाम से ही जानते है एवंहिन्दी भाषी समुदाय में यह कलकत्ता के नाम से जाना जाता रहा है। सम्राटअकबर के चुंगी दस्तावेजों और पंद्रहवी सदी के विप्रदास की कविताओं में इस नाम का बार-बार उल्लेख मिलता है। इसके नाम की उत्पत्ति के बारे में कई तरह की कहानियाँ मशहूर हैं। सबसे लोकप्रिय कहानी के अनुसार हिंदुओं की देवीकाली के नाम से इस शहर के नाम की उत्पत्ति हुई है। इस शहर के अस्तित्व का उल्लेख व्यापारिक बंदरगाह के रूप मेंचीन के प्राचीन यात्रियों के यात्रा वृत्तांत औरफारसी व्यापारियों के दस्तावेजों में मिलता है।महाभारत में भी बंगाल के कुछ राजाओं का नाम है जोकौरव सेना की तरफ से युद्ध में शामिल हुए थे। नाम की कहानी और विवाद चाहे जो भी हों इतना तो तय है कि यह आधुनिकभारत के शहरों में सबसे पहले बसने वाले शहरों में से एक है। 1690 मेंइस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी "जाब चारनाक" ने अपने कंपनी के व्यापारियों के लिये एक बस्ती बसाई थी। 1697 में इस्ट इंडिया कंपनी ने एक स्थानीयजमींदार परिवारसावर्ण रायचौधुरी से तीन गाँव (सूतानुटि, कोलिकाता और गोबिंदपुर) के इजारा लिये। अगले साल कंपनी ने इन तीन गाँवों का विकास प्रेसिडेंसी सिटी के रूप में करना शुरू किया। 1727 मेंइंग्लैंड के राजाजार्ज द्वतीय के आदेशानुसार यहाँ एक नागरिक न्यायालय की स्थापना की गई।कोलकाता नगर निगम की स्थापना की गई और पहलेमेयर का चुनाव हुआ। 1756 में बंगाल के नवाबसिराजुद्दौला ने कोलिकाता पर आक्रमण कर उसे जीत लिया। उसने इसका नाम "अलीनगर" रखा। लेकिन साल भर के अंदर ही सिराजुद्दौला की पकड़ यहाँ ढीली पड़ गयी और अंग्रेजों का इस पर पुन: अधिकार हो गया।१७७२ मेंवारेन हेस्टिंग्स ने इसे ब्रिटिश शासकों की भारतीयराजधानी बना दी। कुछ इतिहासकार इस शहर की एक बड़े शहर के रूप में स्थापना की शुरुआत 1698 मेंफोर्ट विलियम की स्थापना से जोड़ कर देखते हैं। 1912 तक कोलकाता भारत में अंग्रेजो की राजधानी बनी रही।
1757 के बाद से इस शहर पर पूरी तरह अंग्रेजों का प्रभुत्व स्थापित हो गया और 1850 के बाद से इस शहर का तेजी से औद्योगिक विकास होना शुरु हुआ खासकर कपड़ों के उद्योग का विकास नाटकीय रूप से यहाँ बढा हलाकि इस विकास का असर शहर को छोड़कर आसपास के इलाकों में कहीं परिलक्षित नहीं हुआ। 5 अक्टूबर 1865 को समुद्री तूफान (जिसमे साठ हजार से ज्यादा लोग मारे गये) की वजह से कोलकाता में बुरी तरह तबाही होने के बावजूद कोलकात अधिकांशत: अनियोजित रूप से अगले डेढ सौ सालों में बढता रहा और आज इसकी जनसंख्या लगभग 1 करोड़ 40 लाख है। कोलकाता 1980 से पहले भारत की सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला शहर था, लेकिन इसके बादमुंबई ने इसकी जगह ली। भारत की स्वतंत्रता के समय 1947 में और 1971 के भारतपाकिस्तान युद्ध के बाद "पूर्वी बंगाल" (अबबांग्लादेश) से यहाँ शरणार्थियों की बाढ आ गयी जिसने इस शहर की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह झकझोरा।
ऐतिहासिक रूप से कोलकाताभारतीय स्वाधीनता आंदोलन के हर चरण में केन्द्रीय भूमिका में रहा है।भारतीया राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ साथ कई राजनैतिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों जैसे "हिन्दू मेला" और क्रांतिकारी संगठन "युगांतर", "अनुशीलन" इत्यादी की स्थापना का गौरव इस शहर को हासिल है। प्रांभिक राष्ट्रवादी व्यक्तित्वों मेंअरविंद घोष, इंदिरा देवी चौधरानी,बिपिनचंद्र पाल का नाम प्रमुख है। आरंभिक राष्ट्रवादियों के प्रेरणा के केन्द्र बिन्दू बनेरामकृष्ण परमहंस केशिष्यस्वामीविवेकानंद। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष बने श्री व्योमेश चंद्र बैनर्जी औरस्वराज की वकालत करने वाले पहले व्यक्ति श्री सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी भी कोलकाता से ही थे। 19 वी सदी के उत्तरार्द्ध और 20वीं शताब्दी के प्रारंभ मेंबांग्ला साहित्यकारबंकिमचंद्र चटर्जी ने बंगाली राष्ट्रवादियों को बहुत प्रभावित किया। इन्हीं का लिखाआनंदमठ में लिखा गीतवन्दे मातरम् आज भारत का राष्ट्र गीत है।सुभाषचंद्र बोस नेआजाद हिंद फौज का गठन कर अंग्रेजो को काफी साँसत में रखा। इसके अलावारवींद्रनाथ टैगोर काजन गण मन आज भारत का राष्ट्र गान हैं। सैकड़ों स्वाधीनता के सिपाही विभिन्न रूपों में इस शहर में मौजूद रहे हैं।
ब्रिटिश शासन के दौरान जब कोलकाता एकीकृतभारत की राजधानी थी, कोलकाता को लंदन के बादब्रिटिश साम्राज्य का दूसरा सबसे बड़ा शहर माना जाता था। इस शहर की पहचान महलों का शहर, पूरब का मोती इत्यादि के रूप में थी। इसी दौरान बंगाल और खासकर कोलकाता में बाबू संस्कृति का विकास हुआ जो ब्रिटिशउदारवाद और बंगाली समाज के आंतरिक उथल पुथल का नतीजा थी जिसमे बंगालीजमींदारी प्रथाहिंदू धर्म के सामाजिक, राजनैतिक और नैतिक मूल्यों में उठापटक चल रही थी। यह इन्हीं द्वंदों का नतीजा था कि अंग्रेजों के आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों में पढे कुछ लोगों ने बंगाल के समाज में सुधारवादी बहस को जन्म दिया। मूल रूप से "बाबू" उन लोगों को कहा जाता था जो पश्चिमी ढंग की शिक्षा पाकर भारतीय मूल्यों को हिकारत की दृष्टि से देखते थे और खुद को ज्यादा से ज्याद पश्चिमी रंग ढंग में ढालने की कोशिश करते थे। लेकिन लाख कोशिशों के बावज़ूद जब अंग्रेजों के बीच जब उनकी अस्वीकार्यता बनी रही तो बाद में इसके सकारत्म परिणाम भी आये, इसी वर्ग के कुछ लोगो ने नयी बहसों की शुरुआत की जो बंगाल के पुनर्जागरण के नाम से जाना जाता है। इसके तहत बंगाल में सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक सुधार के बहुत से अभिनव प्रयास हुये औरबांग्ला साहित्य ने नयी ऊँचाइयों को छुआ जिसको बहुत तेजी से अन्य भारतीय समुदायों ने भी अपनाया।
कोलकाता भारत की आजादी और उसके कुछ समय बाद तक एक समृद्ध शहर के रूप में स्थापित रहा लेकिन बाद के वर्षों मेंजनसँख्या के दवाब और मूलभूत सुविधाओं के आभाव में इस शहर की सेहत बिगड़ने लगी। 1960 और 1970 के दशकों मेंनक्सलवाद का एक सशक्त आंदोलन यहाँ उठ खड़ा हुआ जो बाद में देश के दूसरे क्षेत्रों में भी फैल गया। 1977 के बाद से यह वामपंथी आंदोलन के गढ के रूप में स्थापित हुआ और तब से इस राज्य मेंभारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी का बोलबाला है।
कोलकातापूर्वी भारत एवंपूर्वोत्तर राज्यों का प्रधान व्यापारिक, वाणिज्यिक एवं वित्तीय केन्द्र है। यहांकोलकाता स्टॉक एक्स्चेंज भी है, जो भारत का दूसरे नंबर का सबसे बड़ा स्टोक एक्स्चेंज है।[3] यहां प्रमुख वाणिज्यिक एवं सैन्य बंदरगाह भी है। इनके साथ ही इस क्षेत्र का एकमात्र अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भी यहीं है। कभी भारत का मुख्य शहर रहे कोलकाता ने स्वतंत्रता पश्चात कुछ आरंभिक वर्षों में अन्वरत आर्थिक पतन को देखा। इसका मुख्य कारण राजनैतिक अस्थिरता एवं व्यापारिक यूनियनों का बढ़ना था।[4] 1960 के दशक से 1990 के मध्य दशक तक शहर की प्रगति गिरती ही गयी, जिसका कारण यहां बंद या यहां से स्थानांतरित होती फैक्ट्रियां और व्यापार थे।[4] इस वजह से पूंजी निवेश एवं संसाधनों की कमी उत्पन्न हुई, जो कि यहां की गिरती आर्थिक स्थिति के भरपूर सहायक कारक सिद्ध हुए।[5]भारतीय आर्थिक नीति के उदारीकरण की प्रक्रिया ने 1990 के दशक में शहर की भाग्यरेखा को नई दिशा दी। इसके बाद उत्पादन भी बढ़ा एवं बेकार श्रमिकों को भी काम मिला।[6] उदाहरणार्थ, यहां के सड़कों पर फेरीवाले लगभग 87.22 अरब रुपये (2005 के आंकड़ों के अनुसार) का व्यापार कर रहे थे।[7]
फ्लावर मार्किट में पुष्प विक्रेता
नगर की श्रमशक्ति में सरकारी एवं निजी कंपनियों के कर्मचारी एक बड़ा भाग बनाते हैं। यहां बड़ी संख्या में अकुशल एवं अर्ध-कुशल श्रमिक हैं, जिनके साथ अन्य कुशल कारीगर भी अच्छी संख्या में कार्यरत हैं। शहर की आर्थिक स्थिति के पुनरुत्थान में सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं का बड़ा हाथ रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र यहां प्रतिवर्ष लगभग 70% की उन्नति कर रहा है, जो राष्ट्रीय औसत का दोगुना है।[8] हाल के वर्षों में यहां गृह-निर्माण एवं रियल एस्टेट क्षेत्र में भी निवेशक उमड़े हैं। इसका कारण एवं परिणाम शहर में कई नई परियोजनाओं का आरंभ होना है।[9] कोलकाता में कई बड़ी भारतीय निगमों की औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं, जिनके उत्पाद जूट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सामान तक हैं। कुछ उल्लेखनीय कंपनियां जिनके यहां मुख्यालय हैं,आईटीसी लिमिटेड,बाटा शूज़,बिरला कॉर्पोरेशन,कोल इंडिया लिमिटेड,दामोदर वैली कॉर्पोरेशन,यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया,यूको बैंक औरइलाहाबाद बैंक, आदि प्रमुख हैं। हाल ही मेंभारत सरकार की पूर्व-देखो (लुक ईस्ट) नीति,नाथू ला दर्रा केसिक्किम में खोले जाने एवंचीन तथादक्षिण पूर्व एशियाई देशों से व्यापारिक संबंध बढ़ाने की नीतियों के कारण यहां कई देशों ने भरतीय बाजार में पदार्पण किया है। इसके चलते कोलकाता में निवेश होने से यहां की अर्थ-व्यवस्था को अप-थर्स्ट मिला है।[10][11]कोलकाता के महानगरीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के हालिया अनुमान $150 से $250 बिलियन (पीपीपी जीडीपी) तक हैं, और इसे भारत का तीसरा सबसे अधिक उत्पादक मेट्रो क्षेत्र माना गया है।[12]
कोलकाता मेंउष्णकटिबंधीय आर्द्र-शुष्क जलवायु रहती है। यहकोप्पेन जलवायु वर्गीकरण के अनुसारAw श्रेणी में आती है। वार्षिक औसत तापमान 26.8°से. ८80°फ़ै.); मासिक औसत तापमान 19°से. से 30°से. (67°फ़ै. से 86°फ़ै.) रहता है।[13]ग्रीष्म ऋतु गर्म एवं आर्द्र रहती है, जिसमें न्यूनतम तापमान ३० डिग्री के दशक में रहता है तथा शुष्क कालों में यह 40°से (104°फ़ै) को भी पार कर जाता है। ऐसामई औरजून माह में होता है।[13]शीत ऋतु ढाई माह तक ही रहती हैं; जिसमें कई बार न्यूनतम तापमान 12°से–12°से. (54°फ़ै.–57°फ़ै.) तक जाता है। ऐसादिसम्बर सेफरवरी के बीच होता है। उच्चतम अंकित तापमान 49°से.°से. 113°फ़ै.) एवं न्यूनतम 5°से. 41°फ़ै.) किया गया है।[13] प्रायः ग्रीष्मकाल के आरंभ में धूल भरी आंधियां आती हैं, जिनके पीछेतड़ित सहित तेज वर्षाएं शहर को भिगोती हैं, एवं शहर को भीषण गर्मी से राहत दिलाती हैं। ये वर्षाएं काल बैसाखी (কালবৈশাখী) कहलाती हैं।[14]
दक्षिण-पश्चिममानसून कीबंगाल की खाड़ी वाली शाखा द्वारा लाई गई वर्षाएं[15] शहर कोजून अंत सेसितंबर के बीच यहां की अधिकतम वार्षिक वर्षा 1582मि.मी. (62.3 इंच) दिलाती हैं। मानसून काल में अधिकतम वर्षाएंअगस्त में होती हैं जो (306मि.मी.) तक जाती हैं। शहर में वार्षिक 2528 घंटे खुली धूप उपलब्ध रहती है, जिसमें अधिकतम दैनिक अंतरालमार्च के महीने में होता है।[16] कोलकाता की प्रधान समस्या प्रदूषण की है। यहां का सस्पेन्डेड पर्टिकुलेट मैटर स्तर भारत के अन्य प्रधान शहरों की अपेक्षा बहुत है,[17][18] जो गहरेस्मॉग औरधुंध का कारण बनता है। शहर में भीषण प्रदूषण ने प्रदूषण-संबंधी श्वास रोगों जैसे फेफड़ों के कैंसर को बढावा दिया है।[19]
कोलकाता नगर निगम (के.एम.सी) के अनुरक्षन में कोलकाता शहर का क्षेत्रफल185कि॰मी2 (71वर्ग मील) है।[20] हालांकि कोलकाता की शहरी बसावट काफ़ी बढ़ी है, जो २००६ में कोलकाता शहरी क्षेत्र1,750कि॰मी2 (676वर्ग मील) में फैली है।[20] इसमें १५७पिन क्षेत्र है।[21] यहां की शहरी बसावट के क्षेत्रों को औपचारिक रूप से ३८ स्थानीय नगर पालिकाओं के अधीन रखा गया है। इन क्षेत्रों में ७२ शहर, ५२७ कस्बे एवं ग्रामीण क्षेत्र हैं।[20] कोलकाता महानगरीय जिले के उपनगरीय क्षेत्रों मेंउत्तर २४ परगना,दक्षिण २४ परगना,हावड़ा एवंनदिया आते हैं।
मुख्य शहर की पूर्व-पश्चिम चौड़ाई काफ़ी कम है, जो पश्चिम मेंहुगली नदी से पूर्वी मेट्रोपॉलिटन बायपास तक मात्र5कि॰मी॰ (3.1मील)–6कि॰मी॰ (3.7मील) होती है।[22] शहर के उत्तर-दक्षिणी विस्तार को मुख्यतः उत्तरी, मध्य एवं दक्षिणी भाग में बांटा जा सकता है। उत्तरी भाग सबसे पुराने भागों में से एक है, जिसमें१९वीं शताब्दी के स्थापत्य और संकरे गली कूचे दिखाई देते हैं। स्वतंत्रता उपरांत अधिकतम दक्षिणी भाग ने प्रगति की है और यहां कई पॉश एवं समृद्ध क्षेत्र हैं जैसे बॉलीगंज, भोवानीपुर, अलीपुर, न्यू अलीपुर, जोधपुर पार्क, आदि। शहर के उत्तर-पूर्वी ओरसॉल्ट लेक सिटी (बिधाननगर) क्षेत्र यहां का व्यवस्थित क्षेत्र है। वहीं निकट ही राजारहाट भी व्यवस्थित एवं योजनाबद्ध क्षेत्र विकसित हो रहा है, जिसे न्यू टाउन भी कहते हैं।
मध्य कोलकाता में बी.बी.डीबाग के पास सेंट्रल बिज़नेस जिला है। यहांबंगाल सरकार सचिवालय,प्रधान डाकघर,उच्च न्यायालय,लाल बाज़ार पुलिस मुख्यालय आदि कई सरकारी इमारतें तथा निजि कार्यालय स्थापित हैं।मैदान कोलकाता के हृदय क्षेत्र में विस्तृत खुला मैदान है, जहां बहुत सी क्रीड़ा और विशाल जन-सम्मेलन आदि आयोजित हुआ करते हैं। बहुत सी कंपनियों ने अपने कार्यालयपार्क स्ट्रीट के दक्षिणी क्षेत्र में बनाये हैं, जिसके कारण यह भी द्वितीयक सेंट्रल बिज़नेस जिला बनता जा रहा है।
अन्यगांगेय क्षेत्रों की तरह यहां की मिट्टी भी उपजाऊ जलोढ़ (अल्यूवियल) ही है। मिट्टी की ऊपरी पर्त के नीचे चतुर्धात्विक अवसाद, मिट्टी, गाद, एवं रेत की विभिन्न श्रेणियां अतथा बजरी आदि है। ये कण मिट्टी की दो पर्तों के बीच बिछे हुए हैं। इनमें से निचली पर्त250मी॰ (820फीट) तथा650मी॰ (2,133फीट) और ऊपरी पर्त10मी॰ (33फीट) तथा40मी॰ (131फीट) की मोटाई की है।[26]भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार, शहरभूकंप प्रभावी क्षेत्र श्रेणी-तृतीय में आता है। यह श्रेणियां 1-4 के बीच बढ़ते क्रम में होती हैं।[27]यूएनडीपी रिपोर्ट के अनुसार वायु और चक्रवात के लिए यह अत्योच्च क्षति जोखिम क्षेत्र में आता है।[27]
के एम सी शहर की जलापूर्तिहुगली नदी से प्राप्त जल से करता है। जल कोउत्तर २४ परगना के निकट पाल्टा जल पंपिंग स्टेशन में शोधित किया जाता है। शहर का दैनिक अवशिष्ट लगभग २५००टन धापा के निकट शहर के पूर्वी क्षेत्र में डम्प किया जाता है। इस डंपिंग स्थल पर कृषि को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे कि यह अवशिष्ट और शहर का मल (सीवर) प्राकृतिक तौर पर पुनर्चक्रित हो पाये।[28] शहर के कुछ भागों में सीवर द्वारा मल निकास का अभाव होने से अस्वास्थवर्धक मल निकास को बढ़ावा मिलता है।[16] शहर की विद्युत आपूर्तिकैल्कटा इलेक्ट्रिक सप्लाई कार्पोरेशन (सी.ई.एस.सी) द्वारा शहर क्षेत्र में, तथापश्चिम बंगाल राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा उपनगरीय क्षेत्रों में की जाती है। १९९० के दशक के मध्य तक विद्युत आपूर्ति में अत्यधिक व्यवधान एवं कटौती की समस्या थी; जो कि अब इसकी दशा में काफ़ी सुधार हुआ है, एवं अब कटौती बहुत ही कम की जाती है। शहर में २० अग्नि-शमन स्टेशनपश्चिम बंगाल अग्नि-शमन सेवा के अन्तर्गत वार्षिक औसत ७५०० अग्निकांडों को शमन करते हैं।[29]
यहां सरकारी रेडियो स्टेशनऑल इंडिया रेडियो से कईए एम रेडियो चैनल प्रसारित करता है। कोलकाता में ग्यारहएफ़ एम रेडियो स्टेशन प्रसारित होते हैं। इनमें से दो ऑल इंडिया रेडियो के हैं। सरकारी टीवी प्रसारणकर्तादूरदर्शन से दो टेरेस्ट्रियल चैनल प्रसारित किये जाते हैं। चार बहु-प्रणाली ऑपरेटार (एम एस ओ) द्वारा बांग्ला, हिन्दी, अंग्रेज़ी व अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल केबल टीवी द्वारा दिखाए जाते हैं।बांग्ला उपग्रह चैनलों मेंएबीपी आनंद,२४ घंटा,कोलकाता टीवी,चैनल १० तथातारा न्यूज़ प्रमुख हैं।
वी.आई.पी मार्ग, शहर को हवाई अड्डे से जोड़ता एक व्यस्त मार्गभारत में एकमात्र कोलकाता शहर में ट्राम चलती हैं।विद्यासागर सेतु कोलकाता कोहावड़ा से जोड़ता हैकोलकाता शहर (रात में)
कोलकाता में जन यातायातकोलकाता उपनगरीय रेलवे,कोलकाता मेट्रो, ट्राम और बसों द्वारा उपलब्ध है। व्यापक उपनगरीय जाल सुदूर उपनगरीय क्षेत्रों तक फैला हुआ है।भारतीय रेल द्वारा संचालितकोलकाता मेट्रो भारत में सबसे पुरानी भूमिगत यातायात प्रणाली है।[31] ये शहर में उत्तर से दक्षिण दिशा मेंहुगली नदी के समानांतर शहर की लंबाई को १६.४५ कि.मी. में नापती है। यहां के अधिकांश लोगों द्वारा बसों को प्राथमिक तौर पर यातायात के लिए प्रयोग किया जाता है। यहां सरकारी एवं निजी ऑपरेटरों द्वारा बसें संचालित हैं। भारत में कोलकाता एकमात्र शहर है, जहाँ ट्राम सेवा उपलब्ध है। ट्राम सेवाकैल्कटा ट्रामवेज़ कंपनी द्वारा संचालित है।[32] ट्राम मंद-गति चालित यातायात है, व शहर के कुछ ही क्षेत्रों में सीमित है।मानसून के समय भारी वर्षा के चलते कई बार लोक-यातायात में व्यवधान पड़ता है।[33][34]
भाड़े पर उपलब्ध यांत्रिक यातायात में पीली मीटर-टैक्सी और ऑटो-रिक्शॉ हैं। कोलकाता में लगभग सभी पीली टैक्सियाँ एम्बेसैडर ही हैं। कोलकाता के अलावा अन्य शहरों में अधिकतरटाटा इंडिका याफिएट ही टैसी के रूप में चलती हैं। शहर के कुछ क्षेत्रों में साइकिल-रिक्शा और हाथ-चालित रिक्शा अभी भी स्थानीय छोटी दूरियों के लिए प्रचालन में हैं। अन्य शहरों की अपेक्षा यहां निजी वाहन काफ़ी कम हैं। ऐसा अनेक प्रकारों के लोक यातायात की अधिकता के कारण है।[35] हालांकि शहर ने निजी वाहनों के पंजीकरण में अच्छी बड़ोत्तरी देखी है। वर्ष२००२ के आंकड़ों के अनुसार पिछले सात वर्षों में वाहनों की संख्या में ४४% की बढ़त दिखी है।[36] शहर के जनसंख्या घनत्व की अपेक्षा सड़क भूमि मात्र ६% है, जहाँदिल्ली में यह २३% औरमुंबई में १७% है। यही यातायात जाम का मुख्य कारण है।[37] इस दिशा मेंकोलकाता मेट्रो रेलवे तथा बहुत से नये फ्लाई-ओवरों तथा नयी सड़कों के निर्मान ने शहर को काफ़ी राहत दी है।
कोलकाता निवासियों को कलकतिया कहा जाता है। वर्ष २००१ की जनगणनानुसार कोलकाता शहर की कुल जनसंख्या ४,५८०,५४४ है, जबकि यहां के सभी शहरी क्षेत्रों को मिलाकर १३,२१६,५४६ है। २००९ वर्ष की परियोजनाओं के वर्तमान अनुमान के अनुसार शहर की जनसंख्या ५,०८०,५१९ है।[42] यहां कालिंग अनुपात ९२८ स्त्रियां प्रति १०० पुरुष है।[43]– जो कि राष्ट्रीय औसत से कम है। इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों से काम के लिए आने वाले पुरुष हैं। शहर की साक्षरता दर ८१% है[44] जो राष्ट्रीय औसत ८०% से अधिक है।[45]कोलकाता नगर निगम के क्शेत्रों की पंजीकृत विकार दर ४.१% है, जोभारत के दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों में न्यूनतम है।[46]
बंगाली लोग ही कोलकाता की जनसंख्या का अधिकांश भाग बनाते हैं (५५%), जिनके अलावामारवाड़ी औरबिहारी लोग यहां अल्पसंख्यकों का बड़ा भाग (२०%) हैं।[47] कोलकाता में अल्पसंख्यक समुदायों में चीनी, तमिल, नेपाली, तेलुगु, असमी, गुजराती, आंग्ल-भारतीय,उड़िया औरभोजपुरी समुदाय आते हैं।
जनगणना के अनुसार कोलकाता की जनसंख्या का ८०% भागहिन्दू हैं। शेष १८%मुस्लिम, १%ईसाई और १%जैन लोग हैं। अन्य अल्पसंख्यक समुदायों मेंसिख,बौद्ध,यहूदी औरपारसी समुदाय आते हैं।[48] नगर की जनसंख्या का एक-तिहाई भाग यानि १५ लाख लोग २,०११ पंजीकृत क्षेत्रों और कालोनियों तथा ३,५०० अनाधिकृत क्षेत्रों और झुग्गियों में वास करते हैं।[49]
सन२००४ में भारत के ३५ महानगरों और बड़े शहरों में हुए कुल विशिष्ट और स्थानीय विधि अपराधों का ६७.६% रिपोर्ट हुए थे।[50] कोलकाता जिला पुलिस ने वर्ष२००४ में आई.पी.सी के अंतर्गत १०,५७५ मामले दर्ज किए थे, जो देश में दसवें स्थान पर सबसे अधिक थे।[51]२००६ में शहर की अपराध दर ७१ प्रति १ लाख रही, जो राष्ट्रीय अपराध दर १६७.७ से बहुत कम है और सभी बड़े शहरों से न्यूनतम है।[52] कोलकाता कासोनागाची क्षेत्र १०,००० वेश्याओं सहित,[53]एशिया का सबसे बड़ा रेड-लाइट क्षेत्र है।2011 की जनगणना के अंतिम जनसंख्या योग में शहर की जनसंख्या 4,496,694 बताई गई।[54]
कोलकाता को लंबे समय से अपने साहित्यिक, क्रांतिकारी और कलात्मक धरोहरों के लिए जाना जाता है। भारत की पूर्व राजधानी रहने से यह स्थान आधुनिक भारत की साहित्यिक और कलात्मक सोच का जन्मस्थान बना। कोलकातावासियों के मानस पटल पर सदा से ही कला और साहित्य के लिए विशेष स्थान रहा है। यहां नई प्रतिभाको सदा प्रोत्साहन देने की क्षमता ने इस शहर को अत्यधिक सृजनात्मक ऊर्जा का शहर (सिटी ऑफ फ़्यूरियस क्रियेटिव एनर्जी) बना दिया है।[55] इन कारणों से ही कोलकाता को कभी कभी भारत की सांस्कृतिक राजधानी भी कह दिया जाता है, जो अतिश्योक्ति न होगी।
कोलकाता का एक खास अंग है पारा, यानि पास-पड़ोस के क्षेत्र। इनमें समुदाय की सशाक्त भावना होती है। प्रत्येक पारा में एक सामुदायिक केन्द्र, क्रीड़ा स्थल आदि होते हैं। लोगों में यहां फुर्सत के समय अड्डा (यानि आराम से बातें करना) में बैठक करने, चर्चाएं आदि में सामयिक मुद्दों पर बात करने की आदत हैं। ये आदत एक मुक्त-शैली बुद्धिगत वार्तालाप को उत्साहित करती है।[56]
कोलकाता में बहुत सी इमारतेंगोथिक, बरोक, रोमन और इंडो-इस्लामिक स्थापत्य शैली की हैं। ब्रिटिश काल की कई इमारतें अच्छी तरह से संरक्षित हैं व अब धरोहर घोषित हैं, जबकि बहुत सी इमारतें ध्वंस के कगार पर भी हैं।१८१४ में बनाभारतीय संग्रहालयएशिया का प्राचीनतम संग्रहालय है। यहांभारतीय इतिहास, प्राकृतिक इतिहास और भारतीय कला का विशाल और अद्भुत संग्रह है।[57]विक्टोरिया मेमोरियल कोलकाता का प्रमुखदर्शनीय स्थल है। यहां के संग्रहालय में शहर का इतिहास अभिलेखित है। यहां काभारतीय राष्ट्रीय पुस्तकालय भारत का एक मुख्य और बड़ा पुस्तकालय है। फाइन आर्ट्स अकादमी और कई अन्य कला दीर्घाएं नियमित कला-प्रदर्शनियां आयोजित करती रहती हैं।
कोलकाता के खानपान के मुख्य घटक हैंचावल औरमाछेर झोल,[58] और संग मेंरॉसोगुल्ला और मिष्टि दोइ डेज़र्ट के रूप में। बंगाली लोगों के प्रमुख मछली आधारित व्यंजनों में हिल्सा व्यंजन पसंदीदा हैं। अल्पाहार में बेगुनी (बैंगन भाजा), काठी रोल, फुचका औरचाइना टाउन केचीनी व्यंजन शहर के पूर्वी भाग में अधिक लोकप्रिय हैं।[59][60]
बंगाली महिलायें सामान्यतयासाड़ी ही पहनती हैं। इनकी घरेलू तौर पर साड़ी पहनने की एक विशेष शैली होती है, जो खास बंगाली पहचान है। साड़ियों में यहां की बंगाली सूती और रेशमी विश्व-साड़ियां प्रसिद्ध हैं, जिन्हें तांत नाम दिया गया है। पुरुषों में प्रायः पश्चिमी पेन्ट-शर्ट ही चलते हैं, किंतु त्यौहारों, मेल-मिलाप आदि के अवसरों पर सूती और रेशमी तांत के कुर्ते धोती के साथ पहने जाते हैं। यहां पुरुषों में भी धोती का छोर हाथ में पकड़ कर चलने का चलन रहा है, जो एक खास बंगाली पहचान देता है। धोती अधिकांशातः श्वेत वर्ण की ही होती है।
दुर्गा पूजा कोलकाता का सबसे महत्त्वपूर्ण और चकाचौंध वाला उत्सव है।[61] यह त्यौहार प्रायःअक्टूबर के माह में आता है, पर हर चौथे वर्षसितंबर में भी आ सकता है। अन्य उल्लेखनीय त्यौहारों मेंजगद्धात्री पूजा, पोइला बैसाख,सरस्वती पूजा,रथ यात्रा, पौष पॉर्बो,दीवाली,होली,क्रिस्मस,ईद, आदि आते हैं। सांस्कृतिक उत्सवों मेंकोलकाता पुस्तक मेला, कोलकाता फिल्मोत्सव, डोवर लेन संगीत उत्सव और नेशनल थियेटर फेस्टिवल आते हैं।
१९९० के आरंभिक दशक से ही भारत में जैज़ और रॉक संगीत का उद्भव हुआ था। इस शाइली से जुड़े कई बांग्ला बैण्ड हैं, जिसे जीबोनमुखी गान कहा जाता है। इन बैंडों में चंद्रबिंदु, कैक्टस, इन्सोम्निया, फॉसिल्स और लक्खीचरा आदि कुछ हैं। इनसे जुड़े कलाकारों में कबीर सुमन, नचिकेता, अंजना दत्त, आदि हैं।
मैदान और फोर्ट विलियम, हुगली नदी के समीप भारत के सबसे बड़े पार्कों में से एक है। यह 3 वर्ग कि॰मी॰ के क्षेत्र में फैला है। मैदान के पश्चिम में फोर्ट विलियम है। चूंकि फोर्ट विलियम को अब भारतीय सेना के लिए उपयोग में लाया जाता है यहां प्रवेश करने के लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। ईडन गार्डन्स मेंएक छोटे से तालाब में बर्मा का पेगोडा स्थापित किया गया है, जो इस गार्डन का विशेष आकर्षण है। यह स्थान स्थानीय जनता में भी लोकप्रिय है। विक्टोरिया मेमोरियल, १906-2१ के बीच निर्मित यह स्मारक रानी विक्टोरिया को समर्पित है। इस स्मारक में शिल्पकला का सुंदर मिश्रण है। इसके मुगल शैली के गुंबदों में सारसेनिक और पुनर्जागरण काल की शैलियां दिखाई पड़ती हैं। मेमोरियल में एक शानदार संग्रहालय है, जहां रानी के पियानो और स्टडी-डेस्क सहित 3000 से अधिक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। यह रोजाना प्रात: १0.00 बजे से सायं 4.30 बजे तक खुलता है, सोमवार को यह बंद रहता है। सेंट पॉल कैथेड्रल चर्च शिल्पकला का अनूठा उदाहरण है, इसकी रंगीन कांच की खिड़कियां, भित्तिचित्र, ग्रांड-ऑल्टर, एक गॉथिक टावर दर्शनीय हैं। यह रोजाना प्रात: 9.00 बजे से दोपहर तक और सायं 3.00 बजे से 6.00 बजे तक खुलता है। नाखोदा मस्जिद लाल पत्थर से बनी इस विशाल मस्जिद का निर्माण १926 में हुआ था, यहां १0,000 लोग आ सकते हैं। मार्बल पैलेस, एम जी रोड पर स्थित आप इस पैलेस की समृद्धता देख सकते हैं। १800 ई. में यह पैलेस एक अमीर बंगाली जमींदार का आवास था। यहां कुछ महत्वपूर्ण प्रतिमाएं और पेंटिंग हैं। सुंदर झूमर, यूरोपियन एंटीक, वेनेटियन ग्लास, पुराने पियानो और चीन के बने नीले गुलदान आपको उस समय के अमीरों की जीवनशैली की झलक देंगे। पारसनाथ जैन मंदिर, १867 में बना यह मंदिर वेनेटियन ग्लास मोजेक, पेरिस के झूमरों और ब्रूसेल्स, सोने का मुलम्मा चढ़ा गुंबद, रंगीन शीशों वाली खिड़कियां और दर्पण लगे खंबों से सजा है। यह रोजाना प्रात: 6.00 बजे से दोपहर तक और सायं 3.00 बजे से 7.00 बजे तक खुलता है। बेलूर मठ, बेलूर मठ रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है, इसकी स्थापना १899 में स्वामी विवेकानंद ने की थी, जो रामकृष्ण के शिष्य थे। यहां १938 में बना मंदिर हिंदु, मुस्लिम और इसाईशैलियों का मिश्रण है। यह अक्टूबर से मार्च केदौरान प्रात: 6.30 बजे से ११.30 बजे तक और सायं 3.30 बजे से 6.00 बजे तक तथा अप्रैल से सितंबर तक प्रात: 6.30 बजे से ११.30 बजे तक और सायं 4.00 बजे से 7.00 बजे तक खुलता है।
दक्षिणेश्वर काली मंदिर.
हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित यह मां काली का मंदिर है, जहां श्री रामकृष्ण परमहंस एक पुजारी थे और जहां उन्हें सभी धर्मों में एकता लाने की अनुभूति हुई। काली मंदिर सडर स्ट्रीट से 6 कि॰मी॰ दक्षिण में यह शानदार मंदिर कोलकाता की संरक्षक देवी काली को समर्पित है। काली का अर्थ है "काला"। काली की मूर्ति की जिह्वा खून से सनी है और यह नरमुंडों की माला पहने हुए है। काली, भगवान शिव की अर्धांगिनी, पार्वती का ही विनाशक रूप है। पुराने मंदिर के स्थान पर ही वर्तमान मंदिर १809 में बना था। यह प्रात: 3.00 बजे से रात्रि 8.00 बजे तक खुलता है। सनातन धर्म प्रचारिणी सभा, श्रीश्रीनागेंद्र मठ और नागेंद्र मिशन कोलकाता में राजा राममोहन रॉय रोड पर स्थित हैं। भादुड़ी महाशय या महर्षि नागेन्द्रनाथ की स्मृति इस पवित्र धार्मिक स्थल से जुड़ी हुई है। यहीं पर भादुड़ी महाशय की 'अस्थियों' को जमीन में दफनाया गया था और उनके ऊपर एक समाधि मंदिर बनाया गया था।[62] इसी आधार पर 1926 में इस भवन में श्रीश्री नागेन्द्र मठ की स्थापना की गई। नागेन्द्र मिशन की स्थापना 2005 में हुई थी।[63] भक्तों के लिए भादुड़ी बाहर से शिव और अंदर से विष्णु थे।परमहंस योगानन्द ने पश्चिम जाने से पहले इस भादुड़ी महाशय का आशीर्वाद प्राप्त किया था।[64] भादुड़ी महाशय यानि महर्षि नागेंद्रनाथ ने योग मार्ग के सभी मार्गों में सिद्धि प्राप्त की थी। उनके लघिमा सिद्ध योगी होने का प्रमाण परमहंस योगानंद की आत्मकथा और सानंदलाल घोष द्वारा लिखित पुस्तक 'मेजदा' में मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान नारायण ने स्वयं इस महान योगी को योग की दीक्षा दी थी। उनकी सिद्धियों के चमत्कारी प्रभाव आज भी कोलकाता में राममोहन राय रोड स्थित श्रीश्रीनागेन्द्र मठ और नागेन्द्र मिशन में मौजूद हैं, जो उनके अंतिम जीवन की तपस्या का स्थान है। वह दिव्य प्रभाव आज भी देश-विदेश के भक्तों द्वारा महसूस किया जाता है। मदर टेरेसा होम्स इस स्थान की यात्रा आपकी कोलकाता यात्रा को एक नया आयाम देगी। काली मंदिर के निकट स्थित यह स्थान सैंकड़ों बेघरों और "गरीबों में से भी गरीब लोगों" का घर है - जो मदर टेरेसा को उद्धृत करता है। आप अपने अंशदान से जरुरतमंदों की मदद कर सकते हैं। बॉटनिकल गार्डन्स कई एकड़ में फैली हरियाली, पौधों की दुर्लभ प्रजातियां, सुंदर खिले फूल, शांत वातावरण...यहां प्रकृ ति के साथ शाम गुजारने का एक सही मौका है। नदी के पश्चिमी ओर स्थित इस गार्डन में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़ है, जो १0,000 वर्ग मीटर में फैला है, इसकी लगभग 420 शाखाएं हैं।
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